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भाजपा के आंतरिक सर्वे से विधायकों की बढ़ी बेचैनी, टिकट को लेकर देहरादून से दिल्ली तक तेज हुई दौड़

2027 विधानसभा चुनाव से पहले संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता बढ़ी, पांच साल के कामकाज और जनता के फीडबैक पर पार्टी की नजर

उत्तरकाशी। उत्तराखंड में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा के भीतर तैयारियां तेज होने के साथ ही संभावित प्रत्याशियों को लेकर चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया है। पार्टी के स्तर पर कराए जा रहे आंतरिक सर्वे की चर्चाओं ने खासतौर पर सिटिंग विधायकों की चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, सर्वे में जनता के बीच विधायकों की पकड़, पांच वर्षों के कार्यकाल और क्षेत्र में सक्रियता समेत कई बिंदुओं पर फीडबैक लिया जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक सर्वे की आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

सर्वे की चर्चाओं के बीच उत्तरकाशी जिले की तीनों विधानसभा सीटों में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा के संभावित दावेदारों ने संगठन के वरिष्ठ नेताओं से संपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया है। देहरादून से लेकर विधानसभा क्षेत्रों तक राजनीतिक बैठकों और मुलाकातों का दौर चल रहा है। समर्थक अपने-अपने नेताओं के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं।

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पांच साल के कामकाज पर जनता की राय बनी अह

सूत्रों के मुताबिक पार्टी के आंतरिक सर्वे में विधायकों के पांच वर्षों के कार्यकाल को भी प्रमुख आधार बनाया गया है। क्षेत्र में विकास कार्यों, जनता के बीच उपलब्धता, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय और स्थानीय स्तर पर पकड़ को लेकर फीडबैक लिया जा रहा है। चर्चा यह भी है कि जिन विधायकों के कामकाज को लेकर जनता में नाराजगी सामने आ रही है, उनके स्थान पर मजबूत जनाधार वाले चेहरों को मौका देने पर पार्टी विचार कर सकती है।

भाजपा के सामने 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता विरोधी रुझान यानी एंटी-इनकंबेंसी को कम करने की चुनौती भी रहेगी। ऐसे में पार्टी ऐसे चेहरों पर दांव लगाने की रणनीति बना सकती है, जिनकी जनता के बीच अच्छी पकड़ हो और जो संगठन के साथ बेहतर तालमेल रखते हों। हालांकि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व और चुनावी परिस्थितियों के आकलन के बाद ही होगा।

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सर्वे की खबरों पर विधायक की प्रतिक्रिया चर्चा में

उत्तरकाशी विधानसभा क्षेत्र में सर्वे से जुड़ी खबरों को लेकर एक विधायक की ओर से पत्रकारों और खबरों के स्रोत पर सवाल उठाए जाने की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में है। बताया जा रहा है कि जौनपुर क्षेत्र से यमुनाघाटी में आए निजी स्कूल व टैक्सी संचालक के यूट्यूब प्लेटफॉर्म पर विधायक की ओर से सर्वे संबंधी खबरों पर प्रतिक्रिया दी गई। इस प्रतिक्रिया के बाद क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

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उत्तरकाशी की तीनों सीटों का रहा है अलग चुनावी इतिहास

उत्तरकाशी जिले की गंगोत्री, यमुनोत्री और पुरोला विधानसभा सीटों के चुनावी इतिहास को लेकर भी भाजपा के रणनीतिकारों की नजर बनी हुई है। राज्य गठन के बाद जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर सिटिंग विधायक के दोबारा निर्वाचित होने का इतिहास लगातार चर्चा का विषय रहा है। ऐसे में वर्ष 2027 के चुनाव में पार्टी किसी भी तरह का जोखिम लेने के बजाय जमीनी फीडबैक और संभावित प्रत्याशियों की लोकप्रियता को महत्व दे सकती है।

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राज्य मंत्री, दायित्वधारी के टिकट कि संभावनाएं नहीं : सूत्र

भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि संगठन में टिकट के संभावित दावेदारों के बीच बढ़ती सक्रियता पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी चाहती है कि दायित्वधारी अपने निर्धारित दायित्वों पर ध्यान दें और संगठन को मजबूत करने में भूमिका निभाएं। समय से पहले चुनावी टिकट को लेकर गुटबाजी शुरू होने से पार्टी को नुकसान हो सकता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2027 के चुनाव में भाजपा अपने मौजूदा विधायकों पर भरोसा जताती है या सर्वे, जनमत और जमीनी समीकरणों के आधार पर नए चेहरों को मैदान में उतारती है। अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व के स्तर पर होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी।

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