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राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण में देरी पर समिति नाराज, 15 सितंबर तक निस्तारण की मांग

मोरी तहसील के 23 राज्य आंदोलनकारियों के लंबित चिन्हीकरण का मामला, मांग पूरी न होने पर 16 सितंबर से तहसील व जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी

उत्तरकाशी। तहसील मोरी क्षेत्र के राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण में हो रही देरी को लेकर चिन्हित उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी समिति (रजि.), तहसील मोरी ने नाराजगी जताई है। समिति ने जिला अधिकारी उत्तरकाशी को ज्ञापन भेजकर लंबित चिन्हीकरण प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण करने की मांग की है।

समिति के अनुसार, तहसील मोरी से 23 राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण के लिए आवेदन-पत्र जिला स्तर पर भेजे गए थे। ज्ञापन में कहा गया है कि वर्ष 2021 में भी चिन्हीकरण की प्रक्रिया में दस्तावेज शासन को समय से प्रेषित नहीं होने के कारण कई राज्य आंदोलनकारी चिन्हीकरण से वंचित रह गए थे।

समिति का कहना है कि इसके बाद भी वर्ष 2024 में मोरी और पुरोला क्षेत्र के प्रकरण सामने आए। तत्कालीन जिला अधिकारी की अध्यक्षता में हुई जिला स्तरीय समिति की बैठक में प्रत्येक नाम पर चर्चा की गई तथा जीओडी की नकल के आधार पर चिन्हीकरण की संस्तुति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई थी।

ज्ञापन के मुताबिक, वर्ष 2026 में सरकार की ओर से राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की समयसीमा को पहले 23 जुलाई 2026 तक और फिर 23 सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया। इसके बावजूद चिन्हीकरण सूची सार्वजनिक नहीं होने पर समिति ने सवाल उठाए हैं।

समिति ने बताया कि 18 मई 2026 को उपजिला अधिकारी की अध्यक्षता में पुरोला तहसील कार्यालय में तहसील स्तरीय चिन्हीकरण समिति की बैठक हुई थी। इसके बाद 21 मई 2026 को जिला अधिकारी कार्यालय उत्तरकाशी में जिला स्तरीय चिन्हीकरण समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें लंबित प्रकरणों पर विस्तार से चर्चा की गई।

समिति का आरोप है कि बैठकों के दौरान उचित जांच के बाद सभी नाम सार्वजनिक कर शासन को समय से भेजने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक चिन्हीकरण सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे मोरी और पुरोला के राज्य आंदोलनकारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

समिति ने जिला प्रशासन से मांग की है कि 15 सितंबर 2026 तक चिन्हीकरण प्रकरणों का निस्तारण किया जाए। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय तक मांग पूरी नहीं होने पर 16 सितंबर 2026 से तहसील और जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। समिति ने इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होने की बात कही है।

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