नेटवाड़ में ग्रामीणों का सतलूज जल विद्युत निगम के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना
भूमि के मुआवजे समेत अन्य मांगों को लेकर ग्रामीणों ने शुरू किया आंदोलन, परियोजना प्रबंधन ने जिला प्रशासन के सहयोग से जल्द समाधान का दिया भरोसा

उत्तरकाशी। मोरी विकासखंड के नेटवाड़ गांव में ग्रामीणों ने सतलूज जल विद्युत निगम के खिलाफ मंगलवार से अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना द्वारा करीब 25 से 30 नाली भूमि का अधिग्रहण किए जाने के बावजूद उन्हें अब तक उचित मुआवजा नहीं दिया गया है।
पूर्व प्रधान पति राजेश रावत का कहना है कि ग्रामीण वर्ष 2023 से अपनी भूमि के मुआवजे की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिले हैं। उनका आरोप है कि ग्रामीणों की सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण किया गया और मुआवजे के लिए ग्रामीणों को लगातार कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि क्षेत्र के विकास और जनकल्याण के लिए सतलूज परियोजना की ओर से कई योजनाओं और सुविधाओं का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक उन वादों को धरातल पर नहीं उतारा गया। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर विधवा महिलाओं को मिलने वाली सहयोग राशि भी बंद किए जाने की बात कही जा रही है।
परियोजना प्रबंधन ने क्या कहा?
सतलूज जल विद्युत निगम के नेटवाड़ परियोजना प्रमुख का कहना है कि ग्रामीण करीब दो माह पूर्व भी धरने पर बैठे थे। इसके बाद समस्या के समाधान के लिए सतलूज की ओर से जिला प्रशासन के साथ सात बार बैठकें की जा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन के सहयोग से ग्रामीणों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया गतिमान है और जल्द ही इसका समाधान होने की उम्मीद है।
विधवा महिलाओं की सहयोग राशि के संबंध में परियोजना प्रमुख ने बताया कि जिस जनपदीय फंड से यह राशि उपलब्ध कराई जाती थी, उसमें फिलहाल बजट समाप्त हो गया है।
फिलहाल ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी भूमि के मुआवजे और अन्य मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।



