सतलुज परियोजना प्रभावितों के मुआवजे को लेकर डीएम ने की बैठक, लंबित मामलों के समाधान पर जोर
अधिग्रहित भूमि के सीमांकन और प्रतिकर मामलों में पारदर्शिता के निर्देश, ग्रामीणों और परियोजना अधिकारियों के बीच गतिरोध खत्म करने की कवायद

उत्तरकाशी, 25 अगस्त 2026। मोरी विकासखंड क्षेत्र में सतलुज जल विद्युत परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों की अधिग्रहित भूमि के प्रतिकर (मुआवजे) से जुड़े लंबित मामलों को लेकर जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी हॉल में बैठक की। बैठक का उद्देश्य परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों और परियोजना अधिकारियों के बीच आपसी समन्वय स्थापित कर भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजे से जुड़े मामलों का नियमानुसार समाधान निकालना रहा।
बैठक में अधिग्रहित भूमि के सीमांकन, प्रतिकर से जुड़े लंबित प्रकरणों तथा ग्रामीणों और परियोजना प्रबंधन के बीच उत्पन्न गतिरोध को समाप्त करने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि भूमि अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है, ताकि प्रभावित ग्रामीणों को उनके अधिकारों के अनुरूप न्याय मिल सके।
डीएम प्रशांत आर्य ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीणों की ओर से रखी जा रही मांगों पर न्यायसंगत और नियमानुसार विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि परियोजना से प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा के साथ-साथ विकास कार्यों की गति भी बनी रहनी चाहिए। इसके लिए दोनों पक्षों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर लंबित मामलों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किए जाने की जरूरत है।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि परियोजना और जनहित से जुड़े मुद्दों के बीच संतुलन कायम करते हुए ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे प्रभावित परिवारों के अधिकार सुरक्षित रहें और परियोजना का कार्य भी निर्बाध रूप से संचालित होता रहे।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से भूमि सीमांकन और प्रतिकर से जुड़े मामलों की स्थिति की जानकारी लेते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में ग्रामीणों की ओर से भी अपनी समस्याएं और मांगें रखी गईं, जिन पर नियमानुसार विचार किए जाने का आश्वासन दिया गया।
बैठक में एडीएम मुक्ता मिश्र, सतलुज जल विद्युत परियोजना के विभिन्न अधिकारी तथा प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण मौजूद रहे।



