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उत्तराखण्ड क्षेत्र पंचायत सदस्य संगठन को मिली स्थायी संरचना |Uttarakhand Kshetra Panchayat Member Sangathan ko Mili Sthayi Sanrachna

एडवोकेट विपिन पंवार सर्वसम्मति से प्रदेश अध्यक्ष नामित


देहरादून।

Uttarakhand Kshetra Panchayat Member Sangathan ko Mili Sthayi Sanrachna | उत्तराखण्ड के क्षेत्र पंचायत सदस्यों के अधिकारों और सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम पहल करते हुए आज 20 जनवरी 2026 को गांधी पार्क, देहरादून में प्रदेशभर के क्षेत्र पंचायत सदस्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से उत्तराखण्ड क्षेत्र पंचायत सदस्य संगठन के अस्थायी ढांचे को स्थायी स्वरूप प्रदान किया गया।

बैठक के दौरान संगठन की प्रदेश कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसमें एडवोकेट विपिन पंवार को सर्वसम्मति से संगठन का प्रदेश अध्यक्ष नामित किया गया। वहीं कृपाल सिंह राणा को संगठन का प्रदेश महामंत्री चुना गया।

प्रदेश कार्यकारिणी का गठन

बैठक में संगठन के विभिन्न पदाधिकारियों की घोषणा इस प्रकार की गई—

प्रदेश संयोजक: राकेश उत्तराखण्डी, राजेन्द्र दुर्गापाल, विशन सिंह रांगड़, मंगल सिंह बिष्ट, प्रभात नेगी

संरक्षक: प्रमिला राणा, प्रमोद कुमार, जयकृष्ण उनियाल, मनोज भट्ट, आशीष तोमर

उपाध्यक्ष: अर्जुन मेहरा, मनोज चौहान, रचना रावत, मनोज प्रसाद सेमवाल, नन्द किशोर थपलियाल, मनोज कुमार जोशी, मोहनीश चौधरी

प्रदेश सचिव: घनश्याम नेगी, कल्पना पंवार, धर्मेन्द्र सिंह, महावीर सेनवाल, महावीर सिंह बिष्ट

प्रदेश सहसचिव: रचिता ठाकुर, राकेश नाथ, रणवीर चौहान, प्रदीप राणा, रीना तोमर

कोषाध्यक्ष: गम्भीर सिंह नेगी, किशोरी लाल

सह कोषाध्यक्ष: श्याम सिंह चौहान

प्रदेश प्रवक्ता: मातबर सिंह चौहान, महेन्द्र पर्त्याल, आकाश नेगी, कृष्णा राणा, शालिनी कोठियाल

मीडिया प्रभारी: नवीन शाह, दीपक सुनेरी, सोबत सिंह, विविता, प्रमेश रावत, सुषमा राणा

इसके साथ ही प्रदेश के सभी क्षेत्र पंचायत सदस्यों को संगठन की कार्यकारिणी का सदस्य बनाए जाने का निर्णय लिया गया।

क्षेत्र पंचायतों की उपेक्षा पर उठे सवाल

प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट विपिन पंवार ने कहा कि 73वें संविधान संशोधन के तहत त्रिस्तरीय पंचायती व्यवस्था में क्षेत्र पंचायत एक महत्वपूर्ण कड़ी है, लेकिन उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम 2016 में क्षेत्र पंचायत को अपेक्षित अधिकार नहीं दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि न तो क्षेत्र पंचायत सदस्यों को वित्तीय अधिकार प्राप्त हैं और न ही धारा 192 के अंतर्गत किसी प्रकार के मानदेय का प्रावधान, जिससे यह पद केवल नाममात्र का बनकर रह गया है और पूरी पंचायती व्यवस्था कमजोर हो रही है।

मानदेय व वित्तीय अधिकारों की मांग

प्रदेश महामंत्री कृपाल सिंह राणा ने कहा कि एक क्षेत्र पंचायत के अंतर्गत 2 से 6 ग्राम पंचायतें आती हैं और जनता की अपेक्षाएं क्षेत्र पंचायत सदस्य से अधिक होती हैं।

लेकिन विकास निधि और वित्तीय अधिकारों के अभाव में सदस्य जन अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाता। मानदेय न होने से यह पद आर्थिक रूप से भी कमजोर हो गया है और वर्तमान में इसकी भूमिका केवल ब्लॉक प्रमुख के चुनाव तक सीमित रह गई है।

राजनीति से ऊपर उठकर संघर्ष का संकल्प

प्रदेश संयोजक राकेश उत्तराखण्डी ने कहा कि यह संगठन राजनीति से ऊपर उठकर क्षेत्र पंचायत सदस्यों के अधिकारों की लड़ाई लड़ेगा और शासन-प्रशासन के समक्ष उनकी मांगों को मजबूती से उठाएगा, ताकि क्षेत्र पंचायत सदस्यों को भी ग्राम प्रधानों के समान अधिकार मिल सकें।

बड़ी संख्या में सदस्य रहे मौजूद

बैठक में मनोज लखेड़ा, विनोद कुमार, रणवीर सिंह राणा, रोहित कुमार, संजना सैनी, अनिश, महेन्द्र कुमार, पवन चन्द, अर्जुन सिंह रौंछेला, पुष्पा सिंग्स्वाल, पुष्पा नेगी, बीना रमोला, रोनिका, सुमित सिंग्स्वाल, गजेन्द्र भण्डारी, कैलाश चन्द, जयप्रकाश मौर्या, संजू देवी सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र पंचायत सदस्य उपस्थित रहे।

 

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