10 सूत्रीय मांगों को लेकर मोरी ब्लॉक प्रधान संगठन ने खोला मोर्चा, 16 सितंबर को ब्लॉक मुख्यालय में तालाबंदी का ऐलान
प्रधानों को ₹20 हजार मानदेय, मनरेगा में ऑफलाइन हाजिरी, 29 विभागों के कार्य ग्राम पंचायतों को सौंपने समेत विभिन्न मांगें; सरकार पर आश्वासन के बाद भी मांगें पूरी न करने का आरोप

मोरी/उत्तरकाशी। ग्राम पंचायत गुराड़ी मोरी के प्रधान एवं प्रधान संगठन मोरी के अध्यक्ष कैलाश प्रसाद डिमरी ने विधायक पुरोला को पत्र भेजकर ब्लॉक प्रधान संगठन की 10 सूत्रीय मांगों के निराकरण की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि मांगों का समाधान नहीं होने पर 16 सितंबर 2026 को सुबह 10 बजे से ब्लॉक मुख्यालय में एक दिवसीय सांकेतिक तालाबंदी प्रदर्शन किया जाएगा। 

प्रधान संगठन ने पत्र के माध्यम से सरकार के समक्ष विभिन्न मांगें रखी हैं। इनमें ग्राम प्रधानों को न्यूनतम ₹20 हजार प्रतिमाह मानदेय देने तथा ग्राम पंचायत वार्ड सदस्यों को भी खुली बैठक में प्रतिभाग करने पर मानदेय देने की मांग शामिल है।
संगठन की दूसरी प्रमुख मांग मनरेगा/वीबी-जी-आरएएमजी योजना में श्रमिकों की उपस्थिति को पूर्ण रूप से ऑफलाइन किए जाने की है। पत्र में पर्वतीय क्षेत्रों में नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या का हवाला देते हुए कहा गया है कि ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में दिक्कत होती है। साथ ही अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी ₹600 प्रतिदिन और कुशल मजदूरों की मजदूरी ₹800 प्रतिदिन किए जाने की मांग की गई है।
प्रधान संगठन ने ग्राम पंचायतों के राज्य वित्त/केंद्रीय वित्त की धनराशि को जनसंख्या और भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर बढ़ाने, जिला योजना मद में स्वीकृत होने वाले विकास कार्यों के प्रस्ताव ग्राम पंचायतों की खुली बैठक में अनिवार्य रूप से पारित कराने और जिला योजना की बैठक में प्रधान संगठन को नामित सदस्य के रूप में आमंत्रित करने की मांग भी की है।
पत्र में पंचायतीराज एक्ट में पारित 29 विभागों के कार्य ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने, विधायक/सांसद निधि की तर्ज पर ग्राम प्रधान निधि के लिए बजट में व्यवस्था करने की मांग रखी गई है, ताकि ग्राम पंचायतों में आकस्मिक आपदा, आगजनी या आवश्यकता के अनुसार विकास कार्य तेजी से किए जा सकें।
इसके अलावा किसी भी विभाग द्वारा स्वीकृत 10 लाख रुपये तक के कार्यों की कार्यदायी संस्था ग्राम पंचायत को बनाए जाने की मांग की गई है। प्रधानों और उनके परिवारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पंचायत राज विभाग के माध्यम से स्वास्थ्य बीमा/जीवन बीमा कराए जाने की मांग भी पत्र में शामिल है।
प्रधान संगठन ने प्रधानमंत्री आवास प्लस सर्वे-2024 में नाम होने के बावजूद आवास सॉफ्टवेयर द्वारा जनरेट प्राथमिकता सूची में नाम नहीं आने वाले जरूरतमंद ग्रामीण लाभार्थियों को अतिरिक्त प्रधानमंत्री आवास सॉफ्ट प्राथमिकता सूची में शामिल करने की मांग उठाई है।
दसवीं मांग के तहत 16वें वित्त की नई गाइडलाइन के अनुसार ग्राम पंचायतों पर प्रति परिवार ₹100 प्रतिमाह यानी ₹1,200 वार्षिक टैक्स लगाने की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए इसमें संशोधन कर ग्राम पंचायतों को टैक्स लगाने की बाध्यता से मुक्त करने की मांग की गई है। पत्र में कहा गया है कि टैक्स लागू नहीं होने पर 16वें वित्त की धनराशि में 20 प्रतिशत कटौती का आदेश प्राप्त हुआ है।
पत्र में प्रधान संगठन ने कहा है कि सरकार द्वारा अब तक 10 सूत्रीय मांगों का निराकरण नहीं किया गया है और बार-बार आश्वासन दिए जाने से प्रदेश के प्रधानों में नाराजगी है। इसी के चलते 16 सितंबर को सुबह 10 बजे से ब्लॉक मुख्यालय पर एक दिवसीय सांकेतिक तालाबंदी प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है। पत्र में प्रदर्शन के दौरान उत्पन्न होने वाली जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होने की बात भी कही गई है।



