अस्पताल है, लेकिन इलाज के लिए डॉक्टर नहीं! आराकोट–बंगाण की जनता कब तक भटकेगी?
डॉक्टर और जरूरी स्टाफ की कमी से आराकोट अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित, क्षेत्रवासियों में बढ़ रहा आक्रोश

उत्तरकाशी। जनपद उत्तरकाशी के विकासखंड मोरी के सीमांत आराकोट–बंगाण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आराकोट स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से डॉक्टर समेत आवश्यक स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि अस्पताल भवन और स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद पर्याप्त स्टाफ के अभाव में उन्हें उपचार के लिए दूर-दराज के अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर, स्टाफ नर्स, वार्ड बॉय और फोर्थ क्लास कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं। वहीं केंद्र में तैनात एकमात्र फार्मेसिस्ट के अवकाश पर होने के कारण स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाएं और अधिक प्रभावित हो गई हैं।
अधिकारियों से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक उठाई आवाज
क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता एवं युवा नेता मनमोहन सिंह चौहान ने आराकोट–बंगाण क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर जिला चिकित्सा अधिकारी समेत संबंधित विभागीय अधिकारियों को लगातार लिखित रूप से अवगत कराया है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल को भी क्षेत्र की स्वास्थ्य समस्याओं से लिखित रूप में अवगत कराते हुए आवश्यक चिकित्सकीय स्टाफ की तैनाती की मांग की है। हालांकि, उनका कहना है कि अब तक स्वास्थ्य केंद्र में आवश्यक स्टाफ की तैनाती नहीं हो सकी है।
“इलाज चाहिए, आश्वासन नहीं”
मनमोहन सिंह चौहान का कहना है कि सीमांत और दूरस्थ क्षेत्र के लोगों के लिए स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र जीवनरक्षक सुविधा से कम नहीं है। ऐसे में यदि अस्पताल में डॉक्टर और जरूरी स्वास्थ्य कर्मचारी ही उपलब्ध नहीं होंगे तो गंभीर स्थिति में मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने सरकार से आराकोट अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तत्काल डॉक्टर, स्टाफ नर्स, वार्ड बॉय और अन्य आवश्यक कर्मचारियों की तैनाती करने की मांग की है।
जनता का सवाल—अस्पताल कब खुलेगा, डॉक्टर कब आएंगे?
आराकोट–बंगाण क्षेत्र के लोगों का सीधा सवाल है कि जब स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त स्टाफ ही नहीं है तो उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं आखिर कहां से मिलेंगी? ग्रामीणों का कहना है कि सीमांत क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के दावे तभी धरातल पर साबित होंगे, जब अस्पतालों में डॉक्टर और जरूरी स्टाफ की नियमित तैनाती सुनिश्चित की जाएगी।
अब देखना होगा कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग आराकोट–बंगाण क्षेत्र की इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या पर कब तक कार्रवाई करते हैं और अस्पताल में डॉक्टर समेत आवश्यक स्टाफ की तैनाती कब होती है।



