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सेब उत्पादक किसानों के हित में उठी मांग, हाई डेंसिटी एप्पल प्लांटेशन को ऋण और फसल बीमा योजना में शामिल करने की अपील

मोरी ब्लॉक सहित उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्पर वैरायटी और सीडलिंग रूट स्टॉक आधारित सघन बागवानी को अलग श्रेणी देने की मांग, समाजसेवी जगदीश रांगड़ ने उद्यान विभाग को भेजा ज्ञापन

उत्तरकाशी। मोरी ब्लॉक सहित उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही सघन सेब बागवानी (हाई डेंसिटी एप्पल प्लांटेशन) को कृषि ऋण और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल किए जाने की मांग उठी है। समाजसेवी एवं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन के जिला महासचिव उत्तरकाशी जगदीश रांगड़ ने मुख्य उद्यान अधिकारी उत्तरकाशी को ज्ञापन भेजकर इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान समय में मोरी ब्लॉक और प्रदेश के अन्य पर्वतीय क्षेत्रों के अधिकांश किसान पारंपरिक सेब उत्पादन के बजाय स्पर वैरायटी (Spur Variety) और सीडलिंग रूट स्टॉक आधारित सघन एवं अति सघन बागवानी प्रणाली अपना रहे हैं। क्षेत्र के लगभग 70 प्रतिशत किसान इसी आधुनिक प्रणाली के तहत सेब उत्पादन कर अपनी आजीविका चला रहे हैं।

ज्ञापन के अनुसार सघन एवं अति सघन बागवानी में वैज्ञानिक पद्धति से पौधारोपण किया जाता है, जिससे प्रति हेक्टेयर उत्पादन क्षमता बढ़ती है और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। हालांकि वर्तमान ऋण सीमा निर्धारण एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में केवल सामान्य सेब खेती का ही उल्लेख है, जबकि आधुनिक हाई डेंसिटी बागवानी को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया है।

जगदीश रांगड़ ने कहा कि इस कारण क्षेत्र के किसानों को पर्याप्त कृषि ऋण सुविधा और फसल बीमा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। आधुनिक बागवानी प्रणाली अपनाने के बावजूद किसानों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ज्ञापन में मांग की गई है कि स्पर वैरायटी एवं सीडलिंग रूट स्टॉक आधारित सघन बागवानी को कृषि ऋण सीमा में पृथक श्रेणी के रूप में शामिल किया जाए। साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में भी इन आधुनिक बागवानी प्रणालियों को शामिल कर किसानों को लाभान्वित किया जाए। इसके अलावा क्षेत्रीय परिस्थितियों और वास्तविक पौध संख्या के आधार पर ऋण सीमा का पुनर्निर्धारण करने की भी मांग की गई है।

उन्होंने विश्वास जताया कि विभाग द्वारा सकारात्मक कार्रवाई किए जाने पर क्षेत्र के हजारों किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा तथा आधुनिक बागवानी को बढ़ावा मिलेगा

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