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पुरोला BJP में ‘ऑल इज नॉट वेल’! गेस्ट हाउस विवाद के बाद अंदरूनी कलह हुई उजागर

गेस्ट हाउस विवाद के बाद भाजपा में कथित गुटबाजी की चर्चा तेज, टिकट को लेकर भी सियासी हलचल; मालचंद, राजकुमार और दुर्गेश लाल के नामों की चर्चा

उत्तराखंड की पुरोला विधानसभा में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के भीतर चल रही कथित खींचतान अब चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। सोमवार शाम पुरोला लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में वर्तमान विधायक दुर्गेश लाल की मौजूदगी में भाजपा कार्यकर्ताओं और विधायक समर्थकों के बीच हुए कथित विवाद के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है।

सूत्रों के अनुसार, गेस्ट हाउस में बातचीत के दौरान कथित तौर पर अमर्यादित भाषा और अपशब्दों के इस्तेमाल को लेकर माहौल गरमा गया। बताया जा रहा है कि विधायक के एक समर्थक द्वारा कथित तौर पर पार्टी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के बाद वहां मौजूद कुछ भाजपा कार्यकर्ता नाराज हो गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालांकि, पूरे घटनाक्रम के वास्तविक कारणों और उसमें शामिल लोगों के बयानों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

अनुशासित पार्टी के दावे के बीच गेस्ट हाउस विवाद ने खड़े किए   सयाल 

भाजपा खुद को अनुशासित कैडर आधारित राजनीतिक दल के रूप में प्रस्तुत करती रही है। ऐसे में पार्टी के कार्यकर्ताओं और विधायक समर्थकों के बीच सार्वजनिक रूप से विवाद की चर्चा ने संगठनात्मक अनुशासन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस घटनाक्रम के बाद भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच भी आगामी विधानसभा चुनाव और टिकट आवंटन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

एक तरफ क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर असंतोष और विधायक पर लगाए जा रहे जातीय राजनीति से जुड़े आरोपों की चर्चाएं हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायक समर्थकों के बीच बढ़ती कथित खींचतान भाजपा के लिए नई चुनौती बनती दिखाई दे रही है। हालांकि, जातीय राजनीति से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का जवाब भी इस खबर में उपलब्ध नहीं है।

क्या दुर्गेश लाल के टिकट पर संकट?

राजनीतिक जानकारों का दावा है कि भाजपा के कथित आंतरिक सर्वे को लेकर चल रही चर्चाओं में वर्तमान विधायक दुर्गेश लाल की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं पूर्व विधायक मालचंद की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता और लोकप्रियता को भी वर्तमान विधायक खेमे के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, भाजपा की ओर से अभी तक टिकट को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए आंतरिक सर्वे या टिकट को लेकर चल रही चर्चाओं को फिलहाल राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

तीन नामों की चर्चा, किस पर लगेगी हाईकमान की मुहर?

भाजपा से जुड़े सूत्रों के हवाले से टिकट की दावेदारी को लेकर तीन नामों की चर्चा सामने आ रही है—

1. पूर्व विधायक मालचंद

2. दर्जाधारी मंत्री राजकुमार

3. वर्तमान विधायक दुर्गेश लाल

यदि यही तीन नाम पार्टी के संभावित पैनल में रहते हैं, तो शीर्ष नेतृत्व के सामने पुरोला से प्रत्याशी चयन को लेकर बड़ा राजनीतिक फैसला होगा।

टिकट के बाद सबसे बड़ी परीक्षा—एकजुटता!

भाजपा के लिए असली चुनौती केवल टिकट घोषित करने तक सीमित नहीं होगी। टिकट मिलने के बाद पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।

सवाल यह है कि यदि तीन दावेदारों में से किसी एक के नाम पर अंतिम मुहर लगती है, तो बाकी दो दावेदार और उनके समर्थक क्या पार्टी के फैसले को स्वीकार कर अधिकृत प्रत्याशी के साथ मजबूती से खड़े होंगे?

या फिर टिकट से नाराजगी दल-बदल, निर्दलीय दावेदारी अथवा भीतरघात जैसी परिस्थितियों को जन्म देगी?

फिलहाल पुरोला भाजपा के सामने कई सवाल

– क्या गेस्ट हाउस विवाद पार्टी की अंदरूनी खींचतान का संकेत है?

– क्या भाजपा का जमीनी कार्यकर्ता मौजूदा हालात से नाराज है?

– क्या टिकट को लेकर वर्तमान विधायक की दावेदारी वास्तव में चुनौती में है?

– क्या मालचंद की बढ़ती सक्रियता भाजपा के समीकरण बदल रही है?

– राजकुमार की दावेदारी कितनी मजबूत है?

– और सबसे बड़ा सवाल—टिकट के बाद क्या तीनों खेमे एकजुट होकर भाजपा के लिए चुनाव लड़ेंगे?

पुरोला की सियासत में फिलहाल इन सवालों के जवाब भाजपा हाईकमान के अगले कदम पर निर्भर हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शीर्ष नेतृत्व पुरोला से किस चेहरे पर भरोसा जताता है और टिकट की घोषणा के बाद पार्टी के भीतर चल रही कथित नाराजगी किस दिशा में जाती है।

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