Blog
Trending

तीन माह तक प्रशासन ने नहीं खोला रास्ता, ग्रामीणों ने श्रमदान कर बहाल की आवाजाही

मोरी के सटूड़ी गांव में दो सप्ताह तक ग्रामीणों ने हटाया मलबा, पूर्व प्रधान ज्ञान सिंह बोले—मजबूरी में खुद उठानी पड़ी जिम्मेदारी

पुरोला। प्रखंड मोरी के सुदूरवर्ती सटूड़ी गांव के ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन की इंतजार के बजाय खुद श्रमदान कर तीन माह से बंद पड़े पैदल मार्ग को आवाजाही के लिए बहाल कर दिया। ग्रामीणों ने दो सप्ताह तक लगातार मेहनत कर रास्ते पर जमा मलबा और बड़े-बड़े पत्थर हटाए। गांव तक मोटर मार्ग नहीं होने के कारण यह पैदल रास्ता ग्रामीणों की जीवनरेखा है।

ग्रामीणों के अनुसार, करीब तीन माह पूर्व आई आपदा के दौरान पैदल मार्ग पर भारी मात्रा में मलबा और विशाल पत्थर आ गए थे, जिससे रास्ता पूरी तरह बंद हो गया था। इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन को देकर कई बार मार्ग खुलवाने की मांग की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद ग्रामीणों ने आपसी सहयोग और अपने संसाधनों के बल पर दो सप्ताह तक लगातार मलबा हटाकर रास्ता खोल दिया।

गांव के पूर्व प्रधान ज्ञान सिंह ने बताया कि सटूड़ी गांव के लिए अभी तक कोई सड़क मार्ग नहीं है। ग्रामीणों को आवागमन के लिए इसी पैदल रास्ते पर निर्भर रहना पड़ता है। रास्ता बंद होने से सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को उठानी पड़ी। गांव में केवल प्राथमिक विद्यालय है, जबकि उच्च कक्षाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को प्रतिदिन जखोल और अन्य गांवों तक पैदल जाना पड़ता है।

क्षेत्र प्रमुख रणदेव राणा ने ग्रामीणों की इस पहल की सराहना करते हुए बताया कि क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग की मरम्मत एवं पुनर्निर्माण के लिए ब्लॉक स्तर से जिलाधिकारी को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट स्वीकृत होने के बाद श्रमदान करने वाले ग्रामीणों को मजदूरी दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन मार्ग खोलने की कार्रवाई करता तो उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर स्वयं मलबा हटाने की जरूरत नहीं पड़ती। सटूड़ी गांव की यह घटना दूरस्थ क्षेत्रों में आपदा के बाद राहत एवं पुनर्वास कार्यों की गति और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button