पुरोला में नियम-कानून ताक पर! सरकारी भूमि पर बिना स्वीकृति बना दी सड़क, शासन-प्रशासन बना तमाशबीन
पुरोला नगर में कथित रसूखदारों द्वारा बिना विभागीय अनुमति और नियोजन समिति की स्वीकृति के सरकारी भूमि पर सड़क निर्माण किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

जहाँ पुरोला विधानसभा के दर्जनों गांव आज भी मानकों और स्वीकृतियों के नाम पर सड़क सुविधा से वंचित हैं, वहीं पुरोला नगर में कथित रसूखदारों द्वारा बिना किसी विभागीय अनुमति, बिना नक्शा पास और बिना नियोजन समिति की स्वीकृति के सरकारी भूमि पर सड़क निर्माण कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि पूरा प्रशासन सब कुछ देखता रहा और कार्रवाई के नाम पर चुप्पी साधे बैठा रहा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नेताओं की छत्रछाया में पल रहे कुछ लोगों को अब कानून का कोई डर नहीं रह गया है। चाहें आम रास्तों पर कब्जा करना हो या सरकारी भूमि को खुर्द-बुर्द कर निर्माण कार्य करना — सब कुछ खुलेआम किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बिना मानकों और स्वीकृति के बनाई गई इस सड़क पर यदि कोई बड़ा हादसा हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या सरकारी भूमि पर इस तरह अवैध निर्माण करने वालों पर कानूनी कार्यवाही नहीं होनी चाहिए?
क्या संबंधित विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच नहीं होनी चाहिए?
इस पूरे मामले पर जब उप जिलाधिकारी पुरोला से बात की गई तो उन्होंने कहा कि “यह मामला हमारी जानकारी में नहीं है, तहसीलदार पुरोला को जांच हेतु भेजा जा रहा है।”
अब देखना यह होगा कि जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है या फिर वास्तव में सरकारी भूमि पर नियमों को रौंदने वालों पर कार्रवाई होती है


