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राजकीय महाविद्यालय बड़कोट में NSS सात दिवसीय विशेष शिविर का द्वितीय दिवस ज्ञान, अनुशासन और जागरूकता को समर्पित

औद्योगिक लापरवाही की कीमत: एक गलती, पीढ़ियों तक जख्म ;डॉ. लीलावती नित्वाल

बड़कोट (उत्तरकाशी)।

राजकीय महाविद्यालय बड़कोट की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर का द्वितीय दिवस ऊर्जा, अनुशासन, सामाजिक चेतना एवं रंगारंग कार्यक्रमों के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

दिवस की शुरुआत प्रातः 5:30 बजे व्यायाम एवं शारीरिक अभ्यास से हुई। इसके पश्चात स्वयंसेवियों ने श्रमदान किया तथा एक जागरूकता रैली निकाली, जिसके माध्यम से ग्रामवासियों को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश दिया गया।

दिवस का मुख्य आकर्षण बौद्धिक सत्र रहा, जिसका संचालन वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. पुष्पेंद्र सेमवाल द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त अध्यापक एवं समाजसेवी श्री दीर्घपाल राणा उपस्थित रहे। उन्होंने अपने जीवनानुभवों के माध्यम से विद्यार्थियों को समाज सेवा, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के प्रति प्रेरित किया तथा शिविर की गतिविधियों की सराहना की।

वनस्पति विज्ञान विभाग के डॉ. जगदीश चंद्र रस्तोगी ने जैविक एवं अजैविक घटकों के संदर्भ में पर्यावरणीय संतुलन की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया।

भूगोल विभाग के डॉ. विनय शर्मा ने आपदा प्रबंधन को पर्यावरणीय संतुलन से जोड़ते हुए प्राकृतिक आपदाओं के कारण, प्रभाव और बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को आपदा की स्थिति में सजगता और सही निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया।

रसायन विज्ञान विभाग की डॉ. लीलावती नित्वाल ने रासायनिक प्रदूषण पर प्रकाश डालते हुए औद्योगीकरण से बढ़ते विषैले रसायनों के दुष्प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने उदाहरण स्वरूप Bhopal Gas Tragedy का उल्लेख करते हुए बताया कि औद्योगिक लापरवाही किस प्रकार मानव जीवन और पर्यावरण पर दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ सकती है।

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम अधिकारी डॉ. पूजा ने कहा कि “पर्यावरण और आपदा एक सिक्के के दो पहलू हैं। जब-जब पर्यावरण असंतुलित होगा, तब-तब वह आपदा का रूप लेगा।” उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने हेतु प्रेरित किया।द्वितीय दिवस की सभी गतिविधियाँ शिविर के उद्देश्यों की पूर्ति की दिशा में अत्यंत सार्थक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुईं।

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