ग्राम प्रधानों के आंदोलन पर सरकार ने दिखाई संवेदनशीलता, 10 सूत्रीय मांगों पर चार सदस्यीय समिति गठित
8 अक्टूबर को सचिवालय कूच के बाद शासन का फैसला, समिति मांगों का बिंदुवार परीक्षण कर देगी अपनी संस्तुति

देहरादून: उत्तराखंड में ग्राम प्रधानों की 10 सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ग्राम प्रधान संगठन की ओर से मुख्यमंत्री को संबोधित मांग पत्र में उठाई गई मांगों के निराकरण के लिए शासन ने चार सदस्यीय समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। समिति मांगों का बिंदुवार परीक्षण कर अपनी संस्तुति सक्षम स्तर पर प्रस्तुत करेगी।
इस संबंध में 8 अक्टूबर 2026 को सचिव, मुख्यमंत्री शैलेश बगोली की ओर से कार्यालय ज्ञापन जारी किया गया है।
सचिवालय कूच के बाद सरकार का फैसला
ग्राम प्रधान संगठन लंबे समय से अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के समक्ष मांगें रख रहा है। इसी क्रम में 8 अक्टूबर को प्रदेशभर से ग्राम प्रधान देहरादून पहुंचे। परेड ग्राउंड में सभा के बाद ग्राम प्रधानों ने सचिवालय कूच किया।
सचिवालय से पहले पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। कुछ ग्राम प्रधानों ने बैरिकेडिंग पार करने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोका। इसके बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर धरने पर बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन के बाद शासन ने मांगों के परीक्षण के लिए चार सदस्यीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है।
चार सदस्यीय समिति में ये अधिकारी शामिल
शासन के आदेश के अनुसार समिति में निम्न अधिकारियों को शामिल किया गया है—

सचिव, पंचायती राज — अध्यक्ष
सचिव, वित्त — सदस्य
सचिव, ग्राम्य विकास — सदस्य
निदेशक, पंचायती राज — सदस्य संयोजक
समिति उत्तराखंड प्रदेश प्रधान संगठन की ओर से रखी गई 10 सूत्रीय मांगों का बिंदुवार परीक्षण करेगी और अपनी संस्तुति सक्षम स्तर पर प्रस्तुत करेगी।
मानदेय और मजदूरी बढ़ाने समेत ये प्रमुख मांगें
ग्राम प्रधानों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम 20 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिए जाने की मांग शामिल है। इसके अलावा मनरेगा/वीबी जीरामजी योजना में पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था में बदलाव की मांग भी उठाई गई है।
ग्राम प्रधानों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या के कारण ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने में परेशानी होती है। उनका दावा है कि इससे विकास कार्य प्रभावित होने के साथ ही श्रमिकों को रोजगार मिलने में भी दिक्कत आती है।
इसके साथ ही ग्राम प्रधानों ने अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी 600 रुपये प्रतिदिन और कुशल श्रमिकों की मजदूरी 800 रुपये प्रतिदिन किए जाने की मांग भी रखी है।
अब समिति की संस्तुति पर टिकी नजर
शासन की ओर से समिति गठित किए जाने के बाद अब ग्राम प्रधान संगठन की 10 सूत्रीय मांगों का बिंदुवार परीक्षण किया जाएगा। समिति की संस्तुतियों के आधार पर सरकार के स्तर से इन मांगों पर आगे निर्णय लिया जाएगा।



