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विकास के दावे हवा-हवाई? सटुड़ी गांव में आज भी लकड़ी के पुल पर जिंदगी का सफर!

**मोरी।** उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच आज भी ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। विकासखंड मोरी की ग्राम पंचायत सटुड़ी की स्थिति भी कुछ ऐसी ही तस्वीर बयां कर रही है, जहां स्थायी पुल का निर्माण नहीं होने के कारण ग्रामीणों को लकड़ी के अस्थायी पुल के सहारे नदी पार करनी पड़ रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर विकास की योजनाओं और दावों के बीच सटुड़ी गांव के लिए एक सुरक्षित पुल का निर्माण क्यों नहीं हो पाया? 

 

## लकड़ी का पुल बना ग्रामीणों की मजबूरी, हर कदम पर खतरा

ग्रामीणों के अनुसार, नदी पर पक्का पुल नहीं होने के कारण उन्हें रोजमर्रा के आवागमन के लिए लकड़ी से बने अस्थायी पुल का सहारा लेना पड़ता है। यह रास्ता केवल आने-जाने का साधन नहीं, बल्कि गांव के लोगों की मजबूरी बन चुका है। बच्चों को स्कूल जाने, महिलाओं को घरेलू जरूरतों के लिए आवाजाही करने, बुजुर्गों को अपने काम निपटाने और बीमार लोगों को उपचार के लिए ले जाने में जोखिम उठाना पड़ता है।

बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने पर स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। ऐसे में सवाल केवल असुविधा का नहीं, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा और संभावित दुर्घटना का भी है। आखिर किसी आपात स्थिति में यदि कोई हादसा हो जाए, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

## जनप्रतिनिधियों के विकास के दावों पर सवाल

एक ओर गांवों के विकास, सड़क-पुलों के निर्माण और दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर सटुड़ी गांव के ग्रामीणों को सुरक्षित पुल जैसी बुनियादी सुविधा के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। यह स्थिति जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करती है।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब गांवों तक विकास पहुंचाने की बात की जाती है, तो सटुड़ी की इस समस्या का स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं हो सका? क्या जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस जोखिम भरे रास्ते की वास्तविक स्थिति की जानकारी है? यदि जानकारी है, तो सुरक्षित पुल के निर्माण की दिशा में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं?

## हादसे का इंतजार या समस्या का समाधान?

किसी भी गांव के विकास का आकलन केवल घोषणाओं, योजनाओं और मंचों से किए गए वादों से नहीं, बल्कि धरातल पर उपलब्ध सुविधाओं से होना चाहिए। सटुड़ी गांव की स्थिति इसी कसौटी पर जिम्मेदारों से जवाब मांग रही है।

ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से मौके का निरीक्षण कराकर स्थायी पुल के निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग की है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार इस मांग को गंभीरता से लेते हैं या ग्रामीणों को इसी तरह जोखिम उठाकर नदी पार करने के लिए मजबूर रहना पड़ेगा।

**सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सटुड़ी गांव को सुरक्षित पुल की सुविधा किसी बड़े हादसे के बाद मिलेगी, या जिम्मेदार समय रहते ग्रामीणों की परेशानी समझकर ठोस कदम उठाएंगे?**

*पहाड़ संदेश की जनहित में पड़ताल: विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच सटुड़ी गांव का यह सवाल जिम्मेदारों के जवाब का इंतजार कर रहा है।*

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