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ट्रांस भारत एविएशन पर उठे सवाल: दो आपात लैंडिंग के बाद हेलीकॉप्टर क्रैश, पुराने हादसों का रिकॉर्ड भी चर्चा में

बदरीनाथ से देहरादून आ रहा हेलीकॉप्टर 30 अक्टूबर को ज्योतिर्मठ घाटी में दुर्घटनाग्रस्त; पिछले छह महीनों में दो आपात लैंडिंग और वर्ष 2025 में दो पायलटों के लाइसेंस निलंबित होने का मामला भी आया सामने।

उत्तराखंड में चारधाम हेली सेवाओं की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बदरीनाथ से देहरादून आ रहा ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर 30 अक्टूबर को ज्योतिर्मठ घाटी में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे के बाद अब कंपनी से जुड़ी पिछली घटनाएं और सुरक्षा रिकॉर्ड भी चर्चा में आ गए हैं।

पिछले छह महीनों के भीतर ट्रांस भारत एविएशन के दो हेलीकॉप्टरों की आपात लैंडिंग हो चुकी है। वहीं, वर्ष 2025 में केदारनाथ क्षेत्र में हुए हादसे के बाद कंपनी के दो पायलटों के लाइसेंस भी छह महीने के लिए निलंबित किए गए थे। इसके अलावा, DGCA के विशेष सुरक्षा ऑडिट में हिमालयी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर संचालन करने वाली आठ कंपनियों के कामकाज में कई खामियां सामने आई थीं।

30 अक्टूबर को ज्योतिर्मठ घाटी में हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर VT-HCX बदरीनाथ से सहस्रधारा के लिए रवाना हुआ था। दोपहर 1 बजकर 14 मिनट पर उड़ान भरने के बाद ज्योतिर्मठ घाटी के ऊपर हेलीकॉप्टर से संपर्क टूट गया। इसके बाद उसकी ट्रैकिंग भी बंद हो गई और कुछ समय बाद हेलीकॉप्टर के क्रैश होने की सूचना सामने आई।

यूसीएडीए के अनुसार, हेलीकॉप्टर में कैप्टन हिमांशु समेत पांच लोग सवार थे। हादसे के बाद भारतीय सेना, जिला प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुट गईं।

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छह महीने में दो बार करानी पड़ी आपात लैंडिंग

ट्रांस भारत एविएशन से जुड़ी यह पहली गंभीर घटना नहीं है। इससे पहले 20 मई 2026 को बदरीनाथ से देहरादून लौट रहा कंपनी का हेलीकॉप्टर टिहरी के धनोल्टी क्षेत्र में 33 केवी हाईटेंशन लाइन से टकरा गया था। हेलीकॉप्टर में सात लोग सवार थे। पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए खेत में आपात लैंडिंग कराई, जिससे सभी लोगों की जान बच गई।

इसके बाद 24 अक्टूबर 2026 को सहस्रधारा से गुप्तकाशी जा रहे कंपनी के एक अन्य हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी आ गई। पायलट ने नई टिहरी के बौराड़ी स्टेडियम में हेलीकॉप्टर उतारा। उसमें छह लोग सवार थे। निरीक्षण के बाद दोबारा उड़ान की अनुमति दी गई।

अब 30 अक्टूबर को कंपनी का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद उसकी पिछली घटनाएं भी चर्चा का विषय बन गई हैं।

वर्ष 2025 में दो पायलटों के लाइसेंस हुए थे निलंबित

ट्रांस भारत एविएशन का नाम वर्ष 2025 में केदारनाथ क्षेत्र में हुए हेलीकॉप्टर हादसे के बाद भी चर्चा में आया था। 15 जून 2025 को गौरीकुंड के पास आर्यन एविएशन का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें सात लोगों की मौत हुई थी।

इसके बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय की कार्रवाई में ट्रांस भारत एविएशन के दो हेलीकॉप्टर खराब मौसम में उड़ान भरते पाए गए थे। इस मामले में VT-TBC के कैप्टन योगेश ग्रेवाल और VT-TBF के कैप्टन जितेंद्र हरजाई के लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित किए गए थे।

DGCA के विशेष ऑडिट में सामने आई थीं खामियां

हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा को लेकर 6 अगस्त 2026 को लोकसभा में दिए गए जवाब में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई थी। वर्ष 2025 में हिमालयी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर संचालन करने वाली आठ कंपनियों का DGCA ने विशेष सुरक्षा ऑडिट किया था।

ऑडिट में पायलटों के उड़ान ड्यूटी समय की निगरानी, पर्वतीय उड़ानों के नियमों का पालन, तकनीकी रखरखाव और आंतरिक सुरक्षा ऑडिट जैसी व्यवस्थाओं में खामियां सामने आई थीं। हालांकि, ये खामियां आठों कंपनियों के ऑडिट के समेकित निष्कर्ष थे। इन्हें केवल ट्रांस भारत एविएशन की व्यक्तिगत खामियां नहीं माना जा सकता।

पहाड़ों में हेलीकॉप्टर संचालन बड़ी चुनौती

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर संचालन मैदानी इलाकों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण है। अचानक बदलता मौसम, कम दृश्यता, संकरी घाटियां, अधिक ऊंचाई और हाईटेंशन लाइन जैसी बाधाएं उड़ान के दौरान जोखिम बढ़ाती हैं।

ऐसे में मौसम की सटीक जानकारी, पायलटों का पर्वतीय प्रशिक्षण, हेलीकॉप्टर की तकनीकी जांच और उड़ान मार्ग की निगरानी बेहद जरूरी हो जाती है।

हादसे के बाद उठे कई सवाल

30 अक्टूबर को हुए हेलीकॉप्टर हादसे के बाद अब कई अहम सवाल सामने हैं। क्या उड़ान से पहले हेलीकॉप्टर की तकनीकी जांच हुई थी? क्या मौसम और उड़ान मार्ग की परिस्थितियों का सही आकलन किया गया था? क्या कंपनी के पिछले रिकॉर्ड और सुरक्षा मानकों की दोबारा समीक्षा होगी?

इन सवालों के जवाब हादसे की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे। फिलहाल इस दुर्घटना ने उत्तराखंड में चारधाम हेली सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित कर दिया है।

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