डायट बड़कोट में पांच दिवसीय विज्ञान डीआरजी कार्यशाला, 28 शिक्षकों ने तैयार किया दक्षता-आधारित प्रश्न बैंक
विषयगत समझ, तार्किक चिंतन और समस्या-समाधान क्षमता विकसित करने वाले प्रश्नों के निर्माण पर हुआ प्रशिक्षण

उत्तरकाशी। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) बड़कोट में 21 से 25 सितंबर 2026 तक विज्ञान विषय की पांच दिवसीय डीआरजी (District Resource Group) कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में जनपद के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों से कुल 28 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए दक्षता-आधारित प्रश्न बैंक (Competency-Based Question Bank) तैयार करना रहा। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को ऐसे प्रश्नों के निर्माण की प्रक्रिया से अवगत कराया गया, जो विद्यार्थियों में विषयगत समझ, तार्किक चिंतन, समस्या-समाधान क्षमता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक हों।
कार्यशाला में निर्धारित दक्षताओं एवं अधिगम प्रतिफलों के अनुरूप विभिन्न प्रकार के प्रश्नों का निर्माण एवं अभ्यास कराया गया। इस दौरान प्रश्न निर्माण में दक्षता, अधिगम प्रतिफल, प्रश्नों का स्तर, संदर्भ-आधारित प्रश्न तथा विद्यार्थियों की वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जुड़ाव जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेष चर्चा की गई।
प्रतिभागियों ने समूह कार्य के माध्यम से प्रश्नों का निर्माण, समीक्षा एवं परिष्करण किया। इस दौरान विज्ञान विषय के विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित दक्षता-आधारित प्रश्न तैयार किए गए।
कार्यक्रम में डायट बड़कोट के प्राचार्य श्री संजीव जोशी ने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में केवल तथ्यों को याद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में ज्ञान को व्यवहार में प्रयोग करने की क्षमता विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दक्षता-आधारित प्रश्न विद्यार्थियों की वास्तविक समझ और अनुप्रयोग क्षमता को बेहतर ढंग से परखने में सहायक होते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से कार्यशाला में प्राप्त अनुभवों को विद्यालय स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम समन्वयक श्री मो. अरशद अंसारी ने कहा कि दक्षता-आधारित प्रश्न बैंक विद्यार्थियों की सीखने की वास्तविक स्थिति को समझने और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण, बाल-केंद्रित एवं पाठ्यक्रम आधारित प्रश्नों के निर्माण पर विशेष ध्यान देने की अपेक्षा की।
पांच दिवसीय कार्यशाला के माध्यम से तैयार प्रश्न बैंक को विद्यालयी शिक्षण और विद्यार्थियों के आकलन में उपयोगी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।



