
पुरोला में विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाने वाले विभागीय इंजीनियरों को अब कथित तौर पर दबाव, शिकायतों और षड्यंत्रों का सामना करना पड़ सकता है। मामला एक ऐसे चर्चित “बूलट राजा” ठेकेदार से जुड़ा बताया जा रहा है, जो इन दिनों ठेकेदारी के दम पर क्षेत्र में अपनी धमक दिखाने में लगा हुआ है।
जानकारों का कहना है कि कभी खुद को कलम का सिपाही बताकर पुरोला में बड़ी-बड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित घटना लव जिहाद में भी अहम किरदार के साथ ही अन्य प्रकरणों में भी चर्चाओं में रहे हैं। पहले तो ये महानुभाव सहयोगी कलमकारों को झोला छाप बोलता था, लेकिन अब विकास कार्यों के बड़े-बड़े ठेकों में सक्रिय हैं। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या अब विकास कार्यों की गुणवत्ता से समझौता कर सरकारी धन को ठिकाने लगाने की कोशिश हो रही है?
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश में इंजीनियरों की हड़ताल के दौरान जब निगरानी कमजोर थी, तभी लाखों रुपये के विकास कार्यों में कथित रूप से भारी अनियमितताओं और गुणवत्ता से खिलवाड़ की शिकायतें सामने आने लगीं। बताया जा रहा है कि संबंधित JE को जब इस फर्जीवाड़े की भनक लगी तो उन्होंने मौके पर सख्ती दिखाई और कार्यों पर सवाल खड़े कर दिए।
बस फिर क्या था… “बूलट राजा” को यह नागवार गुजर गया। आरोप है कि इसके बाद कुछ जनप्रतिनिधियों को गुमराह कर विभागीय JE के खिलाफ उच्च अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजवाया गया।
लेकिन जब इस पूरे मामले में कुछ जनप्रतिनिधियों से वास्तविकता जानने का प्रयास किया गया तो कहानी कुछ और ही निकलकर सामने आई। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसके इशारे पर यह पूरा खेल खेला गया? क्या गुणवत्ता पर सवाल उठाने वाले इंजीनियर को दबाने की कोशिश हो रही है? या फिर विकास कार्यों में हो रहे कथित फर्जीवाड़े पर पर्दा डालने का प्रयास?
पुरोला में इन दिनों यह मामला चर्चाओं का बड़ा विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि विकास कार्यों में गुणवत्ता पर सवाल उठाने वाले अधिकारियों को ही निशाना बनाया जाएगा, तो फिर “जीरो टॉलरेंस” के दावे आखिर किस काम के?
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले से जुड़े कई पुख्ता साक्ष्य और अंदरूनी जानकारियां जल्द सामने लाई जाएंगी, जिसके बाद कई चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।



