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लाखामंडल में भव्य हिंदू सम्मेलन आयोजित, संयुक्त परिवारों व कारीगरों का हुआ सम्मान| Lakhamandal Hindu Sammelan | Rupendra Prakash Ji Maharaj

महामण्डलेश्वर रुपेंद्र प्रकाश जी महाराज के आध्यात्मिक संदेश और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों से बढ़ी सम्मेलन की शोभा

देहरादून, 08 जनवरी।
धर्मनगरी लाखामंडल में सनातन सेवा समिति लाखामंडल के तत्वावधान में शुक्रवार को एक विशाल और भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में महामण्डलेश्वर रुपेंद्र प्रकाश जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। उन्होंने अपने संबोधन में सनातन संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक एकता के संरक्षण पर विशेष बल दिया।

सम्मेलन के दौरान प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल ने हिंदू परंपराओं और संयुक्त परिवार प्रणाली की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि “हिंदू संस्कृति और संयुक्त परिवारों की परंपरा ही हमारे समाज की वास्तविक शक्ति हैं। इन मूल्यों का संरक्षण करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।”

लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

जौनसार–बावर क्षेत्र के सुप्रसिद्ध लोक कलाकार अज्जू तोमर, अत्तर शाह और रेशमा शाह ने पारंपरिक गीत–संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों से सम्मेलन को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया। लोकधुनों और पारंपरिक वेशभूषा ने उपस्थित जनसमूह को अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश दिया।

संयुक्त परिवारों का सम्मान

सम्मेलन में उन परिवारों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जो कई पीढ़ियों से एक ही छत के नीचे प्रेम, सद्भाव और सामाजिक समरसता के साथ रह रहे हैं। सम्मानित परिवारों में शामिल रहे—
धरतोड़ा (म्यूंडा), सिसरामाण (रविवार, भटाड), भराईक (कांडोई), हंसनाण (कुना), गोगराण (मोटी), रमोला (कांडी), भक्ताण (कांडी), खवाउड़ा (लाउडी), रूपाण (धरतोड़ा), धनाण (नाडा) और साज्याण (भटाड)।

कारीगरों और शिल्पकारों को मिला सम्मान

सम्मेलन में समाज के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को भी सम्मानित कर उनके योगदान को सराहा गया। इनमें—

  • वाद्य यंत्र वादक: गुड्डू दास, मनोज दास (मौटी), पूर्ण दास (लाखामंडल), रघुदास (छोटा चंदू)

  • काष्ठ कला एवं मंदिर निर्माण: भगत वर्मा (भटाड), मानु (लावडी)

  • लोहार: बलबीर (लाउडी), जुदवीर (भटाड)

  • नाई: अमित (ग्राम गोदीन)

  • दरज़ी: गुलियो (पणखेत), भगत (छौंटाड), भगत वर्मा (कांडी)

सम्मेलन के माध्यम से सनातन संस्कृति, लोक परंपराओं और पारिवारिक मूल्यों को सहेजने का सशक्त संदेश दिया गया। आयोजकों ने इसे समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

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