Blog

बलदेव मल्ल सम्मान-2025’ से सम्मानित हुए साहित्यकार महावीर रवांल्टा, गद्य साहित्य में विशिष्ट योगदान का मिला राष्ट्रीय सम्मान

लखनऊ के निराला सभागार में भव्य समारोह, देशभर के साहित्यकारों की उपस्थिति में हुआ सम्मान रवांल्टी भाषा और लोक साहित्य को नई पहचान दिलाने वाले रचनाकार को मिला गौरव

हिन्दी साहित्य की गद्य विधा में उल्लेखनीय योगदान के लिए वरिष्ठ साहित्यकार महावीर रवांल्टा को वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित ‘बलदेव मल्ल सम्मान-2025’ प्रदान किया गया। यह सम्मान बी. एम. एन. सेवा संस्थान द्वारा उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के निराला सभागार, हजरतगंज (लखनऊ) में आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया गया।

समारोह में विधानसभा सदस्य पवन सिंह चौहान, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कामेश्वर सिंह, आईएएसए महामहिम राज्यपाल के विशेष सचिव श्रीप्रकाश गुप्त एवं प्रभुनाथ राय सहित देशभर से पधारे साहित्य, कला और संस्कृति के साधक उपस्थित रहे।

संस्थान द्वारा प्रतिवर्ष साहित्य, कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वाले रचनाकारों को यह सम्मान प्रदान किया जाता है।

🎓 साहित्यिक यात्रा

10 मई 1966 को सरनौल गांव में जन्मे तथा वर्तमान में महरगांव निवासी महावीर रवांल्टा ने अस्सी के दशक से साहित्य सृजन की शुरुआत की। अब तक उनके उपन्यास, नाटक, कहानी, कविता, बाल साहित्य, लघुकथा, लोक साहित्य और रवांल्टी भाषा में कुल 46 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

देशभर की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में उनकी रचनाएं प्रकाशित होती रही हैं, साथ ही आकाशवाणी और दूरदर्शन से भी प्रसारित होती रही हैं। विभिन्न विश्वविद्यालयों में उनके साहित्य पर लघु शोध प्रबंध प्रस्तुत हो चुके हैं तथा कई शोधार्थी वर्तमान में शोधरत हैं।

🎭 रंगकर्म और लोकसंस्कृति में योगदान

लोक साहित्य और रंगकर्म में गहरी रुचि रखने वाले रवांल्टा ने अनेक नाटकों का लेखन, निर्देशन और अभिनय किया है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की संस्कार रंग टोली, विशेष बाल श्रमिक विद्यालय, कला दर्पण और मांडी विद्या निकेतन द्वारा उनकी कहानियों पर आधारित नाटकों का सफल मंचन किया जा चुका है।

रवांई क्षेत्र की लोककथाओं और लोकगाथाओं पर आधारित उनकी चर्चित कृतियों में ‘सफेद घोड़े का सवार’, ‘एक प्रेमकथा का अंत’ और ‘धुएं के बादल’ विशेष रूप से उल्लेखनीय रही हैं।

📚 भाषा संरक्षण में अहम भूमिका

महावीर रवांल्टा ने भाषा-शोध एवं प्रकाशन केन्द्र वडोदरा (गुजरात) के भारतीय भाषा लोक सर्वेक्षण तथा उत्तराखण्ड भाषा संस्थान के भाषा सर्वेक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ‘पहाड़ के बहुभाषी शब्दकोश – झिक्कल काम्ची ओडायली’ में भी उनका योगदान रहा है। रवांल्टी भाषा में लेखन और उसके प्रचार-प्रसार की शुरुआत का श्रेय भी उन्हें ही दिया जाता है।

🏆 पूर्व में मिल चुके हैं अनेक सम्मान

उन्हें पूर्व में उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान-गोविन्द चातक पुरस्कार सहित उमेश डोभाल स्मृति सम्मान, तिलाड़ी सम्मान, जनधारा सम्मान, उत्तराखण्ड उदय सम्मान और वेद अग्रवाल स्मृति सम्मान जैसे अर्द्धशताधिक सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

उनकी चर्चित लघुकथा ‘तिरस्कार’ पर लघु फिल्म का निर्माण भी हो चुका है।

वर्तमान में महावीर रवांल्टा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पुरोला में मुख्य फार्मेसी अधिकारी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button