
उत्तरकाशी | पुरोला विकासखंड के कंडियालगांव (वार्ड संख्या–01) में निर्माणाधीन आंगनबाड़ी भवन इन दिनों बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा से अधिक विभागीय लापरवाही, निर्णयों की पारदर्शिता और निर्माण गुणवत्ता को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों ने खंड विकास कार्यालय पुरोला और बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- बिना भूमि रजिस्ट्री के पहले आंगनबाड़ी भवन का निर्माण कैसे हुआ
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2005 में कंडियालगांव वार्ड नंबर–01 में एक आंगनबाड़ी भवन का निर्माण किया गया था, लेकिन जिस भूमि पर यह भवन बनाया गया, उसकी विधिवत रजिस्ट्री कभी नहीं कराई गई। सवाल यह उठ रहा है कि जब भूमि का स्वामित्व स्पष्ट नहीं था, तो उस समय भवन निर्माण की अनुमति कैसे दी गई। इससे विभागीय स्तर पर लापरवाही और नियमों की अनदेखी के आरोप और गहरे हो गए हैं।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि लगभग 20–25 वर्ष का निर्धारित कार्यकाल भी पूरा न कर पाने वाला यह भवन अब जर्जर और अनुपयोगी घोषित कर दिया गया, जबकि सरकारी भवनों का उद्देश्य दीर्घकालीन उपयोग होता है। पुराने भवन के ध्वस्त होने के बाद विभाग द्वारा नए आंगनबाड़ी भवन के निर्माण के लिए लगभग 12 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई।
जब भूमि रजिस्ट्री कराई गई है, तो निर्माण किसी अन्य स्थान पर क्यों?
हालांकि, विवाद यहीं खत्म नहीं होता। ग्रामीणों का आरोप है कि नया भवन पुराने स्थल पर न बनाकर किसी अन्य स्थान पर बनाया जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि बाल विकास विभाग के नाम जिस भूमि की विधिवत रजिस्ट्री कराई गई है, उस भूमि पर भवन निर्माण नहीं हो रहा, बल्कि निर्माण कार्य किसी अन्य भू-भाग पर किया जा रहा है, जिसकी वैधानिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
भविष्य में विवाद हुआ तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि भवन निर्माण उसी भूमि पर नहीं किया जा रहा, जिसकी रजिस्ट्री विभाग के नाम है, तो भविष्य में यह भवन भी कानूनी और प्रशासनिक विवादों में फंस सकता है। इससे न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग होगा, बल्कि बच्चों के भविष्य और ग्रामीणों की सुविधा भी प्रभावित होगी।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, निर्माण कार्य पर अस्थायी रोक और आंगनबाड़ी भवन का निर्माण केवल रजिस्टर्ड भूमि पर कराए जाने की मांग की है। साथ ही, दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग उठ रही है।



